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तमाशा


ज्यांना तमाशा मुव्ही समजला नाही त्यांच्यासाठी... 
आणि ज्यांना आवडतो त्यांच्यासाठी....

फ़िर क्या हुआ
होना क्या है...
वही कहानी फ़िर एक बार...
मजनू ने लिये कपडे फाड...
मार तमाशा बीच बाजार....
रुक्के सोचा ऐसा क्यू?
ऐसा वैसा जैसा तैसा... पैसा...
पैसा...
पैसा ना होता तो कैसा होता...
सोचो!
अरे छोडो बोरिंग बाते सारी...
मस्त रहो, जम के खाओ...
ले लो पंगे, छडलो सुली...
फाड लो कपडे, तोड दो बंधन...
खोलदो रस्सी... बोलदो किस्सा...
सभी जनो का दिल बेह लाओ
शोर माचाओ..
मारो ठुमका...
फेक् बिखेरो,
मन कि चांदी...
दिल का सोना
आंख का मोती
सब अर्पित है,
आपकी खातीर
मै नौकर हूं आपका मालिक
टाई पेहेन के लिफ्ट में चढ़कर फ़िर आ उंगा...
आपके आंगान वही करुंगा...
जो रोज किया है
वो फिरसे करुंगा
फिरसे करुंगा
फिरसे करुंगा..
अच्चा बेटा
कभी इधर तो कभी उधर...
अंदर क्या है...
अंदर क्या है...
तारा...
तारा....
कोनसा तारा?
किस मंजिल का?
क्या चक्कर है?
कहा चला है दिल का रस्ता... बिन कदमो के!
दूर खडी है सपनो कि मलीका...
होती रेत है..
लगता पानी...
उसके लिये में पापड बेलु??
दो कौडे कि हस्ती है... पर उससे खेलू??
फेक बिखेरु अपना सब कुछ... उसकी खातीर ?
कीसे चाहिये मन का सोना... आंख का मोती... कीसे पडी है...
अंदर क्या है?
अंदर क्या है?
होती रेत है... लगता पानी...

(तमाशा)
.

जिन्दगी तेरी भी, अजब परिभाषा है ।
सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है ।
.

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